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# हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है? | प्रेरणादायक पौराणिक कथा नमस्कार दोस्तों! क्या आपने कभी सोचा है कि हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे एक बहुत ही सुंदर और भावुक पौराणिक कथा प्रचलित है, जो हमें भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश देती है। आइए, इस कथा को सुनते हैं। एक दिन की बात है। माता सीता अपने कक्ष में बैठी थीं और स्नान के बाद अपनी मांग में सिंदूर भर रही थीं। उसी समय श्री हनुमान जी वहाँ पहुँचे। उन्होंने विनम्रता से पूछा, "माता, आप यह लाल सिंदूर अपनी मांग में क्यों लगाती हैं?" माता सीता मुस्कुराईं और बोलीं, "वत्स, मैं यह सिंदूर अपने प्रभु श्रीराम की लंबी आयु, सुख और मंगल के लिए लगाती हूँ। यह उनके प्रति मेरे प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।" हनुमान जी ने यह बात बड़े ध्यान से सुनी। वे मन ही मन सोचने लगे, "यदि माता सीता केवल एक चुटकी सिंदूर लगाकर प्रभु श्रीराम की आयु और सुख की कामना करती हैं, तो यदि मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूँ, तो मेरे प्रभु को और भी अधिक सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होगी।" यह विचार आते ही हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और प्रसन्न होकर श्रीराम की सभा में पहुँच गए। जब श्रीराम ने हनुमान जी को सिर से पाँव तक सिंदूर से रंगा हुआ देखा, तो वे मुस्कुराए और प्रेम से बोले, "हनुमान, यह तुमने क्या किया?" हनुमान जी ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया, "प्रभु, यदि माता सीता के मांग में लगाए गए थोड़े से सिंदूर से आपका कल्याण होता है, तो मैंने सोचा कि पूरे शरीर पर सिंदूर लगाने से आपका कल्याण और भी अधिक होगा।" हनुमान जी की यह निष्काम भक्ति और अटूट प्रेम देखकर श्रीराम अत्यंत भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "हनुमान, तुम्हारी भक्ति अद्वितीय है। जो भी भक्त श्रद्धा और सच्चे मन से तुम्हें सिंदूर अर्पित करेगा, उसे मेरी भी कृपा प्राप्त होगी और उसके जीवन की अनेक बाधाएँ दूर होंगी।" तभी से हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है। भक्त मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं तथा उनसे शक्ति, साहस, बुद्धि और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। इस कथा का संदेश यही है कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण में होती है। हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि जब प्रेम निष्काम हो, तो भगवान स्वयं प्रसन्न होकर अपने भक्त पर कृपा बरसाते हैं। यदि आपको यह पौराणिक कथा पसंद आई हो, तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ अवश्य साझा करें। **जय श्रीराम! जय बजरंगबली!**
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